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Essay On Paradhin Sapne Hun Sukh Nahi In Hindi

जैसे कि हम सब जानते हैं कि 26 जनवरी 2018 यानी की Republic Day बहुत नज़दीक आ गया है! हम सभी भारतीय इस दिन का बेसब्री से इंतेज़ार कर रहे होते है तो चलिए आज हम इस Blog पोस्ट मे Republic day speech in hindi यानी हम 26 january speech in hindi लिखेंगे!

Republic Day Speech in Hindi for School Students, Teachers and Kids [26 January 2018 - गणतंत्र दिवस पर भाषण]


दोस्तो, इस पोस्ट मे आज हम दो अलग अलग republic day speech in hindi (गणतंत्र दिवस पर भाषण) के बारे मे लिख रहे है! इन speeches को स्कूल के बच्चे, अध्यापक और अन्य लोग जिनको गणतंत्र दिवस पर भाषण वाले स्पीच की ज़रूरत हो इसे इस्तेमाल कर सकते है!


गणतंत्र दिवस पर इन जागहों पर कई प्रकार के कार्यक्रम शिक्षकों और छात्रों द्वारा आयोजित किये जाते हैं जिससे की बच्चों का ज्ञान बढ़ सके और भारत के गणतंत्र दिवास - Republic Day  के विषय में वे जान सकें।

आज के दिन ही हमारे देश का संविधान बना था! आज का दिन हम भारत वासियों के लिए बहुत ही खास होता है! इस दिन को भारत मे एक त्योहार की तरह मनाया जाता है! इस दिन हर एक भारतीय के अंदर देश प्रेम की भावना देखने को मिलती है! जगह-जगह पे प्रेड की जाती है, तिरंगा फहराया जाता है! इस दिन स्कूल के बचों मे भी बहुत उतशाह रहता है!

#1 Republic Day Speech in Hindi (गणतंत्र दिवस पर भाषण)

नमस्कार मैं हूं ....(self introduction)
मैं अपने पूरे देश वासियों को गणतन्त्र दिवस की बधाई देता हूं। साथ ही आने वाले भविष्य की उज्जवल कामना करता हूं

यह तो आप सभी जानते है कि हम हल साल 26 जनवरी के दिन गणतन्त्र दिवस क्यों मनाते है। क्योंकि इस दिन हमारे देश में पूर्ण रूप से आजाद हुआ था। आज हमारे देश को आजाद हुए 70 साल और सविंधान लागु हुए 68 साल होने को जा रहा है।

अगर कोई हम से ये पूछे कि गणतन्त्र दिवस का मतलब क्यो होता है तो कम ही लोग इसका जवाब दे पायेंगे, लेकिन हम आपकों इसका मतलब क्या होता है तो कम ही लोग इसका जवाब दे पायेंगे। लेकिन हम आपकों इसका मतलब सरल शब्दों में समझाने की कोशिश करते है।


गणतंत्र का अर्थ है कि देश में रहने वाले हर एक इंसान के पास सर्वोच्च शाक्ति यानि की सबसे बड़ी शाक्ति होती है जो अपने देश के लिए सही दिशा में देश का विकास करने वाला राजनितिक नेता चुनने का अधिकार है।जो जनता के सुख- दुख को समझते हुए देश की कमान संभाल सके। इसलिए भारत एक गणतंत्र देश है। यहां की जनता ने अपना नेता प्रधानमंत्री के रूप में चुना है। स्वतंत्रता के ढाई वर्ष के बाद भारत सरकार ने स्वयं का संविधान लागु किया और भारत को एक प्रजातांत्रिक गणतंत्र घोषित किया। लगभग 2 वर्ष, 11 महीने और 18 दिन के बाद 26 जनवरी 1950 को भारत के संविधान को भारत की संविधान सभा में पास किया गया। इस घोषणा के बाद से इस दिन को प्रतिवर्ष भारतीय लोग गणतंत्र दिवस के रूप में मनाने लगे।

एक और खास बात यह है कि भारत देश में पूर्ण स्वराज्य हमें इतनी आसानी से प्राप्त नही हुआ है।  इस आजादी के लिए हमारे देश के कई बड़े सेनानियो नें अपने प्राणों की आहुति दी है। तो कईयों ने अपनी जिंदगी में घोर कष्टों का सामना किया। और उन महान वीरों ने इतना संर्घष इसलिए किया है ताकि उनकी आगे की आने वाली पीढ़ी अपनी जिंदगी सुखी से व्यतीत कर सके। और देश को एक उज्जवल भविष्य प्रदान कर सके।

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जिन भारत के वीरों ने हमें अग्रेजों के अत्याचारों से मुक्ति दिलाई है उनके सर्मपण को सदियों तक नही भुलाया जा सकता है। देश के इन वीरों में से कुछ महान नेता और स्वतंत्रता सेनानी हुए। इनमें महात्मा गांधी, भगतसिंह, चन्द्रशेखर आजाद ,लाला लाज पतराय, सरदार वल्लभ भाई पटेल, लाल बहादुर शास्त्री आदि हैं। भारत को एक आजाद देश बनाने के लिए इन लोगों ने अपना सर्वस्य न्यौछावर करते हुए अग्रेंजों के खिलाफ लड़ाई लडी। और इनके सर्मपण को भुल से भी नही भुलाया जा सकता है। हम सभी को इन महान लोगों को सलामी देनी चाहिए। हमेशा ये बात याद रखनी चाहिए, कि हम आज इन्हीं लोगों की वजह से हम आजाद घूम रहे है, अपने दिमाग से सोच रहे है, बिना किसी दबाव के हम देश में मुक्त होकर रह सकते है।.

इस सविंधान को डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने लिखा था। जो विश्व का सबसे लम्बा लिखित सविंधान है। हमारे सविंधान में देश के प्रत्येक लोगो को अपने अधिकार दिए गये है। जिनकी सहायता से प्रत्येक व्यक्ति पूरी स्वतंत्रता के साथ अपना जीवन जी सकता है।लेकिन फिर भी आज ये शर्म से कहना पड़ रहा है कि कुछ लोगों के पास सारे अधिकार होते हुए भी उन अधिकारों से जीवन निर्वहन करने का अधिकार नही है। देश में अभी भी अपराध, भष्टाचार और हिंसा, आंतकवाद ,आदि के गुलाम हो रहे है। भले ही इनसे लड़ने की कोशिश जारी है लेकिन अभी भी सफलता से कोसो दूर है। पूरे देशवासियों को फिर से ऐसी गुलामी से देश को बचाने के लिए एक जुट होना होगा।

धन्यवाद

जय हिन्द, जय भारत

Note: This Republic day speech in hindi is written for Teachers!

#2 Republic Day Speech in Hindi ( 26 January गणतंत्र दिवस पर भाषण)

मेरी आदरणीय प्रधानाध्यापक मैडम,  मेरे आदरणीय सर और मैडम और मेरे सभी सहपाठियों को सुबह का नमस्कार। हमारे गणतंत्र दिवस पर कुछ बोलने के लिये ऐसा एक महान अवसर देने के लिये मैं आपको धन्यवाद देना चाहूंगा। मेरा नाम.....है।(self introduaction)

आज, हमारे राष्ट्र के 66वें गणतंत्र दिवस को मनाने के लिये हम सभी यहाँ पर एकत्रित हुए हैं। हम सभी के लिये ये एक महान और शुभ अवसर है। हमें एक- दूसरे को बधाई देना चाहिये और अपने राष्ट्र के विकास और समृद्धि के लिये भगवान से दुआ करनी चाहिये। हर साल 26 जनवरी को भारत में हम गणतंत्र दिवस मनाते हैं। हम लोग 1950 से ही लगातार भारत का गणतंत्र दिवस मना रहें हैं क्योंकि 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ था।

भारत एक लोकतांत्रिक देश है। लोक तांत्रिक का मतलब सरल शब्दो में कहे तो ........जनता का तंत्र..... जहां देश के नेतृत्व के लिये अपने नेता को चुनने के लिये जनता को अधिकार है। डॉ. राजेन्द्र प्रसाद भारत के पहले राष्ट्रपति थे।1947 में ब्रिटिश शासन से जब से हम ने स्वतंत्रता प्राप्त की है,  तब से हमारे देश ने बहुत विकास किया है। और ताकतवर देशों में गिना जाने लगा है। विकास के साथ साथ देश  में कई प्रकार बड़ी समस्याएं भी सामने आई है जो देश के लिए और लोगों के जीवन के लिए बेहद ही घातक बनती जा रही है। और अगर इन समस्याओं पर ध्यान दे तो वो हमे सुनने में बेहद ही आसान सी लगेगी कि, क्योंकि आए दिन हम हमारे आस पास इन समस्याओं को सुनते रहते है। ये समस्या असमानता, गरीबी , बेरोजगारी, भष्ट्राचार, अशिक्षा आदि है। ये समस्याएं हमारे लिए और आने वाली पीढी के लिए दिन-प्रतिदिन बेहद ही घातक बनती जा रही है। एक तरह से अगर ये कहे कि ये सभी समस्याए हमारे देश को दीमक की तरह धीरे-धीरे खोखला बना रहीहै। जो नजर तो आ रही है, पर उसका हल नही निकाला जा रहा।  लेकिन देश के हर एक इंसान को अपने हिसाब और तरीके से अपने देश को विश्व का एक बेहतरीन देश बनाने के लिए और समाज में ऐसी समस्याओं को सुलझाने के लिए प्रतिज्ञा लेनी पडेगी। 

डॉ. अब्दुल कलाम ने कहा है कि“ अगर एक देश भ्रष्ट्राचार मुक्त होता है और सुंदर मस्तिष्क का एक राष्ट्र बनता है, मैं दृढ़ता से महसूस करता हूं कि तीन प्रधान सदस्य हैं जो अंतर पैदा कर सकते हैं। वो पिता,  माता और एक गुरु हैं”। भारत के एक नागरिक के रुप में हमें इसके बारे में गंभीरता से सोचना चाहिये और अपने देश को आगे बढ़ाने के लिये सभी मुमकिन प्रयास करना चाहिये।

तो हम सभी को डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की कही हुई बातों पर ध्यान करते हुए देश को सही दिशा में ले जाना चाहिए।

धन्यवाद

जय हिन्द,जय भारत

Note: This Republic day speech in hindi is written for School Students!

तो ये थी हमारी republic day speech in hindi और हम उम्मीद करते है की आप सबको बहुत पसंद आया होगा! इन republic day speeches को अपने दोस्तो के साथ भी ज़रूर share करे!

पराधीनता

Paradhinta

निबंध नंबर : 01 

     पराधीनता का आशय – पराधीनता का आशय है – दुसरे के अधीन | अधीनता बहुत बड़ा दुःख है | हर आदमी स्वतंत्र रहना चाहता है | यहाँ तक कि सोने के पिंजरे में बंद पक्षी भी राजमहल के सुखों और स्वादिष्ट भोगों को छोड़कर खुले आकाश में उड़ जाना चाहता है |

स्वतंत्रता : जन्मसिद्ध अधिकार – प्रत्येक बच्चा सवतंत्र पैदा होता है | किसी मनुष्य, देश, समाज या राष्ट्र को यह अधिकार नहीं है कि वह किसी व्यक्ति, देश समूह या राष्ट्र को बलपूर्वक अपने अधीन करे | आज विश्व के अधिकांश संविधान यह स्वीकार कर चिके हैं कि प्रत्येक व्यक्ति को स्वतंत्रता का अधिकार है |

     मैथिलीशरण गुप्त ने कहा है –

अधिकार खोकर बैठ रहना, यह महा दुष्कर्म है |

न्यायार्थ अपने बंधू को भी दंड देना धर्म है |

पराधीनता की हानियाँ – पराधीन व्यक्ति जीवित होते हुए भी मृत के समान होता है | वह दासों के समान परायी और बसी ज़िंदगी जीता है | वह सदा अपने मालिक की और टुकर-टुकर निहारता है | हितोपदेश में कहा गया है – “जो प्रधीन्होने पर भी जीते हैं तो मरे हुए कौन हैं ?”

पराधीनता के प्रकार – पराधीन केवल बही नहीं होता, जिसके पैरों में बेड़ियाँ हों या चारों और दीवारों का घेरे हो | वह व्यक्ति भी पराधीन होता हिया जिसका मन गुलाम है | जैसे अंग्रेजों ने भारतियों को आज़ाद कर दिया, परंतु अनके भारतियों के मन अब भी अंग्रेजों के गुलाम हैं | जैसे अंग्रेजों ने भारतियों को आज़ाद कर दिया, परंतु अनके भारतियों के मन अब भी अंग्रेज़ों के गुलाम हैं | वे आज भी अंग्रेज़ीदां होने में गर्व अनुभव करते हैं | भला ‘निज संस्कुती’ से उखड़े हुए ऐसे लोगों को स्वाधीन या स्वतंत्र कैसे कहें ?

आर्थिक पराधीनता – पराधीनता का एक अन्य महत्वपूर्ण प्रकार है – अधिक पराधीनता | गरीब देशों को न चाहते हुए भी अपने ऋणदाता देशों की कुछ गलत बारें माननी पड़ती हैं | अतः यदि भारतवासियों को आज़ादी का सुख भोगना है तो उन्हें पराधीनता की हर बेड़ी को तोड़ना होगा |

मन के हारे हार है, मन के जीते जीत

     मनुष्य की सबसे बड़ी शक्ति : मन – मानव की सबसे बड़ी शक्ति ‘मन’ है | मनुष्य के पास मन है, इसलिए वह मनुष है, मनुज है, मानव है | मानसिक बाले पर ही मनुष ने आज तक की यह सभ्यता विकसित की है | मन मनुष्य को सदा किसी-न-किसी कर्म में रत रखता है |

मन के दो पक्ष : आशा-निराशा – धुप-छाँव के समान मनव-मन के दो रूप हैं – आशा-निराशा | जब मन में शक्ति, तेज और उत्साह ठाठें मारता है तो आशा का जन्म होता है | इसी के बल पर मनुष्य हज़ारों विपतियों में भी हँसता-मुस्कराता रहता है |

     निराश मन वाला व्यक्ति सारे साधनों से युक्त होता हुआ भी युद्ध हर बैठता है | पांडव जंगलों की धुल फाँकते हुए भी जीते और कौरव राजसी शक्ति के होते हुए भी हारे | अतः जीवन में विजयी होना है तो मन को शक्तिशाली बनाओ |

मन को विजय का अर्थ – मन की विजय का तात्पर्य है – काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार जैसे शत्रुओं पर विजय | जो व्यक्ति इनके वश में नहीं होता, बल्कि इन्हें वश में रखता है, वह पुरे विश्व पर शासन कर सकता है | स्वामी शंकराचार्य लिखते हैं – “जिसने मन जो जीत लिया उसने जगत को जीत लिया |”

मन पर विजय पाने का मार्ग – गीता में मन पर नियंत्रण करने के दो उपाय बाते गए हैं – अभ्यास और वैराग्य | यदि व्यक्ति रोज़-रोज़ त्याग या मोह-मुक्ति का अभ्यास करता रहे तो उसके जीवन में असीम बल बल आ सकता है |

मानसिक विजय ही वास्तविक वियज – भारतवर्ष ने विश्व को अपने मानसिक बल से जीता है, सैन्य-बल से नहीं | यही सच्ची विजय भी है | भारत में आक्रमणकारी शताब्दियों तक लड़-जीत कर भी भारत को अपना न बना सके, क्योंकि उनके पास नैतिक बल नहीं था | शरीर-बल से हारा हुआ शत्रु फिर-फिर आक्रमण करने आता है, परंतु मानसिक बल से परास्त हुआ शत्रु स्वयं-इच्छा से चरणों में लोटता है | इसीलिए हम प्रभु से य्ह्ही प्राथना करते हैं – मानसिक बल से परस्त हुआ शत्रु स्वयं-इच्छा से चरणों में लोटता है | इसीलिए हम प्रभु से यही प्रार्थना करते हैं –

हमको मन की शक्ति देना, मन विजय करें |

दूसरों की जय से पहले, खुद को जय करें ||

 

निबंध नंबर : 02 

पराधीनता

Paradhinta

                                मनुष्य के लिए पराधीनता अभिशाप के समान है। पराधीन व्यक्ति स्वप्न में भी सुख का अनुभव नहीं कर सकता है। समस्त भोग-विलास व भौतिक सुखों के रहते हुए भी यदि वह स्वतंत्र नहीं है तो उसके लिए यह सब व्यर्थ है। पराधीन मनुष्य की वही स्थिति होती है जो किसी पिंजड़ें में बंद पक्षी की होती है जिसे खाने-पीने की समस्त सामग्री उपलब्ध है पंरतु वह उड़ने के लिए स्वतंत्र नहीं है। हालाँकि मनुष्य की यह विडंबना है कि वह स्वंय अपने ही कृत्यों के कारण पराधीनता के दुश्चक्र में फँस जाता है।

                                पराधीनता के दर्द को भारत और भारतवासियों से अधिक कौन समझ सकता है जिन्हें सैकड़ों वर्षों तक अंग्रेजी सरकार के अधीन रहना पड़ा। स्वतंत्रता के महत्व को वह व्यक्ति पूर्ण रूप से समझ सकता है जो कभी पराधीन रहा है। हमारी स्वतंत्रता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। इस स्वतंत्रता के लिए कितने वर्षों तक लोगों ने संघर्ष किया, कितने ही अमर शहीदों ने देश को स्वतंत्र कराने के लिए हँसते-हँसते अपने प्राणों का बलिदान दे दिया।

                                पराधीनता के स्वरूप को यदि हम देखें तो हम पाएँगें कि पराधीन व्यक्ति के लिए स्वेच्छा अर्थहीन हो जाती है। उसके सभी कार्य दूसरों के द्वारा संचालित होते हैं। पराधीन मनुष्य एक समय अंतराल के बाद इन्हीं परिस्थितियों मंे जीने और रहने का आदी हो जाता है। उसकी अपनी भावनाएँ दब जाती हैं। वह संवेदनारहित हो जाता है। तत्पश्चात वह यंत्रवत् होकर काम करता रहता है। ऐसे व्यक्ति को मरा हुआ ही समझा जाता है क्योंकि संवेदनारहित व्यक्ति जिसकी स्वंय की इच्छा या भावनाएँ न हो तो उसका जीवन ही निरर्थक हो जाता है। ऐसे में कोई महापुरूष ही सामान्य जनों को जागृत कर सकते हैं। आम आदमी अपनी पारिवारिक चिंताओं से बाहर निकलने का साहस नहीं जुटा पाता है।

                                प्रसिद्ध फ्रांसीसी रूसों के अनुसार – मानव स्वतंत्र जन्मा है किंतु वह प्रत्येक जगह बंधनों से बँधा हैं। इस कथन पर यदि प्रकाश डालें तो हम पाते है कि मनुष्य प्रत्येक ओर से सांसारिक बंधनों में जकड़ा हुआ है परंतु कुछ बंधन उसने स्वीकार नहीं किए है। परिवार के प्रति उत्तरदायित्वों का निर्वाह, देश अथवा राष्ट्र के उत्थान के लिए प्रयत्न तथा आत्मविश्वास के लिए स्वंय को नियंत्रित करके चलना आदि को पराधीनता नहीं की सकते। इल कृत्यों सें उसकी संवेदनाएँ एवं उसकी स्वेच्छा सम्मिलित है। परंतु अपनी इच्छा के विरूद्ध विवश्तापूर्वक किया गया कार्य पराधीनता का ही एक रूप है। बाल मजदूरी, बँधुआ मजदूरी, धनी एवं प्रभुत्व संपन्न व्यक्तियों की चाटुकारिता पराधीनता के ही विभिन्न रूप कहे जा सकते हैं।

                                पराधीनता से स्वंय का अस्तित्व ही नहीं रह जाता हे। इसके दूरगामी परिणाम होते हैं। आज हमारा युवा वर्ग देश की संस्कृति को उपहास और उपेक्षा की दृष्टि से देखता है तथा पाश्चात्य संस्कृति में विलीन होना चाहता हैं। यह भी पराधीनता का ही एक रूप है। यह एक प्रकार की परतंत्रता की मानसिकता का ही उदाहरण है। अपनी निजता और अस्तित्व को भुलाकर दिखावे और बाह्य आंडबर को प्राथमिकता देना भी पराधीनता का ही एक रूप है। निःसंदेह पराधीनता व्यक्ति को ही नहीं अपितु पूरे समाज और राष्ट्र को पतन की ओर ले जाती है।

                                हमारे देश के लिए इससे अधिक दुर्भाग्यपूर्ण बात और क्या हो सकती है कि हम सैंकड़ों वर्षों की परतंत्रता के बाद मिली आजादी के महत्व को भुला बैठे हैं। देश के सभी क्षेत्रों मे व्याप्त भ्रष्टाचार, लूटमार, कालाबाजारी, व्यभिचार, दुराचार, कमजोरों का उत्पीड़न आदि अनैतिकता को सहज रूप मंे अपनाकर हम स्वतंत्रता के महत्व को भुला रहे हैं। यह उन शहदों और अमर सेनानियों के बलिदान व कुर्बानियों का तिरस्कार ही होगा। अतः हम सभी देशवासियों के महत्व को समझें और प्रयास करें कि हमें पुनः पराधीनता का सामना न करना पड़े।

 

June 27, 2016evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo CommentHindi Essay, Hindi essays

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